पश्चिमी विक्षोभ के सक्रीय होने से उत्तराखण्ड में मौसम का मिजाज बदल गया है। इसके कारण बीती रात राज्य के कई इलाकों में बर्फबारी और बारिश हुई है। देर रात राज्य के ऊँचे इलाकों में बर्फबारी जबकि निचले क्षेत्रों में बारिश हुई है।
देर रात मौसम का मिजाज बदलने के साथ उत्तराखण्ड के कई हिस्सों में बर्फबारी हुई है। देर रात से गंगोत्री, हर्षिल, मुखबा, झाला सुखी, यमुनोत्री में भारी हिमपात हो रहा है। जबकि धनौल्टी, औली, चकराता, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ की ऊँची चोटियों पर बर्फबारी हुई है। चमोली के औली में देर रात से हल्की बर्फबारी हो रही हैं। औली में लगातार बर्फ जारी है। अब तक चार इंच तक बर्फ जम चुकी है। देर रात से जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हिमपात हो रहा है जबकि निचले क्षेत्रों में बारिश हो रही है। बर्फबारी और बारिश होने से राज्य के तमाम क्षेत्रों में तापमान पर भारी गिरावट दर्ज हुई है।
वहीं देहरादून में मौसम का मिजाज बदला है। देहरादून में देर रात से रूक-रूककर बारिश हो रही है। आज चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ के निचले क्षेत्रों में बारिश के आसार हैं। जबकि ऊँचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हो सकती है। बारिश और बर्फबारी के दौर से पारा नींचे लुड़क गया है। और कड़ाके की ठंड हो रही है।
गौरतलब है कि बीते दिनों में मौसम ने अपने मिजाज में बदलाव किया है। हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी के कारण पहाड़ों में ठंड का असर तेज हुआ था। आने वाले दिनों में एक बार फिर मौसम करवट लेने वाला है। मौसम विभाग ने बीती रात यानि 18 जनवरी से नए पश्चिमी विक्षोभ के पश्चिमी हिमालय तक पहुंचने बात कही है। इसके चलते आज से अगले 24 घंटे के दौरान पूरे देश में मौसम शुष्क में बदलाव देखा जायेगा।
पहाड़ों के साथ मैदानी क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड पड़ी रही है। मौसम विभाग के अनुसार देश के कई इलाकों में 22 जनवरी से साल की पहली बारिश देखने को मिल सकती है। मौसम विभाग के अपडेट के मुताबिक, उत्तर पश्चिम भारत में 21 से 25 जनवरी तक एक सक्रिय वेस्टर्न डिस्टरबेंस यनि पश्चिमी विक्षोभ आने वाला है। जिसकी वजह से पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी, बारिश देखने को मिलेगी। वहीं मैदानी क्षेत्रों में भी बारिश देखने को मिलेगी।
पश्चिमी विक्षोभ का असर पूर्वी उत्तर प्रदेश तक रहेगा। और यहां भी छिटपुट बारिश हो सकती है। भारतीय मौसम विज्ञान केन्द्र के अनुसार 24 और 25 जनवरी को देश के कई इलाकों में तेज हवाएं चलेंगी। जिसकी रफ्तार 50 किलोमीटर प्रति घंटा हो सकती है। इससे कड़ाके की ठंड बढ़ेगी।